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हमारी सादगी थी इल्तिफ़ात-ए-नाज़ पर मरना
तिरा आना न था ज़ालिम मगर तम्हीद जाने की

It was our simple heart, to die for your coy, graceful glance,Your coming, cruel one, was but a prelude to your leaving chance.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

हमारी सादगी थी कि हम तुम्हारे नाज़-भरे इल्तिफ़ात (कृपा/ध्यान) पर मर मिटे। ऐ ज़ालिम, तुम्हारा आना वास्तव में आना नहीं था, बल्कि तुम्हारे जाने की भूमिका मात्र थी।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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