बज़्म में उस के रू-ब-रू क्यूँ न ख़मोश बैठिए
उस की तो ख़ामुशी में भी है यही मुद्दआ कि यूँ
“Why should one not sit silently, face-to-face, in their assembly?For even in their silence, their very intent is conveyed as 'thus'.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
उनकी सभा में उनके सामने चुपचाप बैठना चाहिए। क्योंकि उनकी खामोशी में भी यही मतलब है कि 'ऐसा ही है'।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
