मिज़्गाँ तलक रसाई-ए-लख़्त-ए-जिगर कहाँ
ऐ वाए गर निगाह न हो आश्ना-ए-गुल
“How can a fragment of the heart ascend to the eyelashes?Alas, if the gaze is not familiar with the rose's flashes!”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
हृदय का अंश पलकों तक कैसे पहुँच सकता है? अफ़सोस, यदि दृष्टि गुलाब से परिचित न हो।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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