वहशत-ए-आतिश-ए-दिल से शब-ए-तन्हाई में
सूरत-ए-दूद रहा साया गुरेज़ाँ मुझ से
“In the lonely night, from the heart's fierce fire's dread, My very shadow, like smoke, from me fled.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
तन्हाई की रात में, दिल की आग के खौफ से, मेरा साया भी धुएँ की तरह मुझसे दूर भागता रहा।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
