Sukhan AI
दिमाग़-ए-इत्र-ए-पैराहन नहीं है
ग़म-ए-आवारगी-हा-ए-सबा क्या

My mind holds no scent of the garment's perfume;What grief, then, the morning breeze's aimless roam?

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

अगर मेरे दिमाग़ में लिबास की ख़ुशबू नहीं है, तो सुबह की हवा की बेवजह भटकन का क्या ग़म?

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.