कहाँ मय-ख़ाने का दरवाज़ा 'ग़ालिब' और कहाँ वाइ'ज़
पर इतना जानते हैं कल वो जाता था कि हम निकले
“O Ghalib, where is the tavern's door, and where the preacher? But this much we know, yesterday he was leaving as we emerged.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
ऐ ग़ालिब, मय-ख़ाने का दरवाज़ा कहाँ और वाइ'ज़ कहाँ। पर इतना हम जानते हैं कि कल जब हम निकले तो वह जा रहा था।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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