ब-सैल-ए-अश्क लख़्त-ए-दिल है दामन-गीर मिज़्गाँ का
ग़रीक़-ए-बहर जूया-ए-ख़स-ओ-ख़ाशाक-ए-साहिल है
“The heart's torn fragments, by tears' flood swept, Cling to my lashes, where they've sadly slept. Like one submerged, in ocean's vast despair, Who seeks frail straw, from shores beyond compare.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
आँसुओं के सैलाब से बहते हुए दिल के टुकड़े पलकों से लिपटे हुए हैं, जैसे कोई समुद्र में डूबता हुआ किनारे के तिनके और कचरे को सहारा बनाने की तलाश करता है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
