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था मैं गुलदस्ता-ए-अहबाब की बंदिश की गियाह
मुतफ़र्रिक़ हुए मेरे रुफ़क़ा मेरे बा'द

I was the binding grass that held the friends' bouquet,My companions scattered after I was gone.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मैं दोस्तों के गुलदस्ते को बांधने वाली घास था। मेरे जाने के बाद मेरे साथी बिखर गए।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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