गर्दिश-ए-रंग-ए-तरब से डर है
ग़म-ए-महरूमी-ए-जावेद नहीं
“I fear the changing hues of mirth's bright show,Not endless deprivation's bitter woe.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मुझे खुशी के बदलते रूपों का भय है, अनंत अभाव के दुख का नहीं।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
