आगे आती थी हाल-ए-दिल पे हँसी
अब किसी बात पर नहीं आती
“Once, I would laugh at my heart's plight, Now, nothing elicits a smile.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
पहले मुझे अपने दिल की हालत पर हँसी आती थी, लेकिन अब मुझे किसी भी बात पर हँसी नहीं आती है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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