ख़ूँ-चकाँ है जादा मानिंद-ए-रग-ए-सौदाइयाँ
सब्ज़ा-ए-सहरा-ए-उल्फ़त नश्तर-ए-ख़ूँ-रेज़ है
“Blood-dripping is the path, like veins of the insane;The verdure of love's desert, a blood-letting lancet's pain.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
रास्ता पागलों की नसों की तरह खून टपका रहा है। मोहब्बत के सेहरा की हरियाली एक खून बहाने वाला नश्तर है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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