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'ग़ालिब' छुटी शराब पर अब भी कभी कभी
पीता हूँ रोज़-ए-अब्र ओ शब-ए-माहताब में

Ghalib has quit wine, but still, sometimes, I drink on cloudy days and on moonlit nights.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

ग़ालिब ने शराब छोड़ दी है, लेकिन अब भी कभी-कभी मैं बादलों वाले दिनों और चांदनी रातों में पीता हूँ।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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