दिल फिर तवाफ़-ए-कू-ए-मलामत को जाए है
पिंदार का सनम-कदा वीराँ किए हुए
“My heart again proceeds to circumambulate the lane of reproach,Having laid waste the idol-temple of its own pride.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मेरा दिल फिर से निंदा की गली की ओर जा रहा है, अपने अहंकार के मंदिर को वीरान करके।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
