वरक़ तमाम हुआ और मद्ह बाक़ी है
सफ़ीना चाहिए इस बहर-ए-बेकराँ के लिए
“The page is done, but the praise continues; A ship is needed for this boundless ocean.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
पृष्ठ समाप्त हो गया है, परंतु स्तुति अभी भी बाकी है। इस असीमित सागर के लिए एक जहाज़ चाहिए।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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