ब-क़द्र-ए-शौक़ नहीं ज़र्फ़-ए-तंगना-ए-ग़ज़ल
कुछ और चाहिए वुसअत मिरे बयाँ के लिए
“The ghazal's narrow confines cannot hold my passion's sway,My expression needs more vastness, a broader, open way.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
ग़ज़ल की संकीर्ण परिधि मेरे शौक़ की गहराई को धारण नहीं कर सकती। मेरे बयान के लिए और अधिक विस्तार आवश्यक है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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