Sukhan AI
ख़ुदा शरमाए हाथों को कि रखते हैं कशाकश में
कभी मेरे गरेबाँ को कभी जानाँ के दामन को

May God shame those hands that keep in constant struggle, now pulling at my collar, now at the beloved's skirt.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

उन हाथों को ख़ुदा शर्मिंदा करे जो निरंतर खींचतान में लगे रहते हैं, कभी मेरे गिरेबान को खींचते हैं तो कभी प्रिय के दामन को।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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पाठ
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