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हो जहाँ तेरा दिमाग़-ए-नाज़ मस्त-ए-बे-ख़ुदी
ख़्वाब-ए-नाज़-ए-गुल-रुख़ाँ दूद-ए-चराग़-ए-कुश्ता है

Where your proud mind in ecstasy is lost, The graceful dreams of rose-faced ones are but smoke of a lamp, its flame now crossed.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

जहाँ तुम्हारा गर्वित मन परमानंद में लीन हो, वहाँ सुंदर मुखियों के नाजुक सपने बुझे हुए दीपक का धुआँ मात्र हैं।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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