वाँ गया भी मैं तो उन की गालियों का क्या जवाब
याद थीं जितनी दुआएँ सर्फ़-ए-दरबाँ हो गईं
“Should I even go there, how could I respond to their taunts? All the pleas I had remembered were spent on the doorman.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
अगर मैं वहाँ गया भी, तो उनकी गालियों का क्या जवाब दूँगा? मुझे जितनी भी दुआएँ याद थीं, वे सब दरबान पर खर्च हो गईं।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
