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शब कि वो मजलिस-फ़रोज़-ए-ख़ल्वत-ए-नामूस था
रिश्ता-ए-हर-शम'अ ख़ार-ए-किस्वत-ए-फ़ानूस था

That night, when he illuminated the sanctuary of modesty, The wick of every candle was a thorn in the lantern's dress.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

उस रात, जब वह शील के एकांत को प्रकाशित कर रहा था, तो हर शमा की बत्ती फानूस के वस्त्र में एक काँटा बन गई थी।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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