“Don't dig and delve into your grievances so deep, I pray, Beware my heart, for buried fire holds sway.”
अपने शिकायतों की बातें मत कुरेद-कुरेद कर पूछो। मेरे दिल से दूर रहो क्योंकि इसमें आग दबी हुई है।
तुम अपने शिकवे की बातें न खोद खोद के पूछो, हज़र करो मिरे दिल से कि इस में आग दबी है। Tum apne shikve ki baatein na khod khod ke poocho, Hazar karo mere dil se ki is mein aag dabi hai. तुम मेरी शिकायतों की बातों को कुरेद-कुरेद कर मत पूछो। मेरे दिल से दूर रहो क्योंकि इसके अंदर आग दबी हुई है। शिकवा का अर्थ है शिकायत या गिला, और हज़र का अर्थ है दूर रहना या सावधान रहना। मेरे दोस्त, ग़ालिब यहाँ एक बहुत गहरी बात कह रहे हैं। कभी-कभी हम अपने दुख और नाराज़गी को दिल के किसी कोने में दबा देते हैं ताकि हम अपनी ज़िंदगी सुकून से जी सकें। लेकिन अगर कोई बार-बार उन्हीं पुरानी बातों को खोद-खोद कर पूछेगा, तो वो दबा हुआ दर्द फिर से बाहर निकल आएगा। ग़ालिब कह रहे हैं कि मेरी खामोशी को मेरी शांति मत समझो। मेरे अंदर एक आग है जो सिर्फ दबी हुई है, बुझी नहीं है। अगर तुमने इसे छेड़ा, तो ये दर्द तुम्हें भी जला सकता है। यह एक चेतावनी है कि कभी-कभी कुरेदना घाव को ताज़ा कर देता है। यह वैसा ही है जैसे कोई पुराने घाव को बार-बार छू कर देखे कि वो अभी भी दर्द करता है या नहीं। इससे सिर्फ तकलीफ ही बढ़ती है। जैसे कहा जाता है कि आग को हवा दोगे तो शोले ही निकलेंगे। दबे हुए दर्द को खामोश ही रहने दो, उसे जगाना किसी के लिए भी अच्छा नहीं होता।
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