Sukhan AI
दिल ही तो है सियासत-ए-दरबाँ से डर गया
मैं और जाऊँ दर से तिरे बिन सदा किए

It's but the heart, it feared the doorkeeper's strictness,Would I ever leave your door without being summoned?

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

यह तो बस दिल ही था जो दरबान की सख्ती से डर गया। क्या मैं आपकी पुकार के बिना आपके द्वार से कभी लौटता?

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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