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अब्र रोता है कि बज़्म-ए-तरब आमादा करो
बर्क़ हँसती है कि फ़ुर्सत कोई दम है हम को

The cloud weeps, saying, 'Prepare the gathering for joy,'The lightning laughs, saying, 'Do we have leisure even for a moment?'

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

बादल रोता है कि खुशी की महफिल तैयार करो। बिजली हंसती है कि क्या हमें पल भर की भी फुर्सत है?

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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