या सुब्ह-दम जो देखिए आ कर तो बज़्म में
ने वो सुरूर ओ सोज़ न जोश-ओ-ख़रोश है
“Or if you come to see the assembly at dawn,Neither that joy and passion, nor that fervor and zeal remain.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
यदि आप भोर में आकर महफ़िल देखें, तो न वह आनंद और तड़प है, न वह उत्साह और जोश।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
