ने मुज़्दा-ए-विसाल न नज़्ज़ारा-ए-जमाल
मुद्दत हुई कि आश्ती-ए-चश्म-ओ-गोश है
“Neither the joyous news of union, nor the sight of beauty;It has been long since my eye and ear have known such a truce.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
न तो मिलन की कोई शुभ खबर है और न ही किसी सौंदर्य का नज़ारा। बहुत समय हो गया है कि मेरी आँख और कान दोनों शांत हैं, मानो उन्होंने शांति बना ली हो।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
