मक़ाम-ए-शौक़ तिरे क़ुदसियों के बस का नहीं
उन्हीं का काम है ये जिन के हौसले हैं ज़ियाद
“The station of longing is not within the power of your sacred grace, It is the work of those whose aspirations are greater.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
तुम्हारे पवित्र अनुग्रह के बस में यह प्रेम की अवस्था नहीं है, यह उन लोगों का कार्य है जिनके हौसले अधिक हैं।
विस्तार
यह शेर बताता है कि इश्क़ और जुनून का जो मक़ाम होता है, वो सिर्फ़ किसी दैवीय कृपा से नहीं मिल जाता। शायर कहते हैं कि इस तरह का गहरा शौक़... यह तो सिर्फ़ उन लोगों का काम है, जिनके हौसले बहुत बुलंद होते हैं। यानी, दिल की ज़िद और हिम्मत से ही इंसान उस ऊँचाई तक पहुँचता है, जिसे पाना आसान नहीं होता। यह एक आत्म-विश्वास और प्रयास की बात है।
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