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ढूँड रहा है फ़रंग ऐश-ए-जहाँ का दवाम
वाए-तमन्ना-ए-ख़ाम वाए-तमन्ना-ए-ख़ाम

He searches for the cure of the world's pleasure, always, always the yearning for the raw.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

वह दुनिया के आनंद का स्थायी इलाज ढूँढ रहा है, हर पल, हर पल कच्ची इच्छाओं के लिए।

विस्तार

यह शेर चाहत की प्रकृति पर बात करता है। अल्लामा इकबाल कहते हैं कि इंसान दुनियावी सुख या 'ऐश-ए-जहाँ' की दवा ढूंढ रहा है.... लेकिन उसकी जो चाहत है, वो कच्ची और अधूरी है (ख़ाम)। यह एक तंज़ है हमारी दुनियावी ख्वाहिशों पर; हम हमेशा स्थायी खुशी खोजते हैं, मगर हमारी तमन्नाएं तो बस क्षणभंगुर हैं।

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