था अरिनी गो कलीम मैं अरिनी गो नहीं
उस को तक़ाज़ा रवा मुझ पे तक़ाज़ा हराम
“I am not that Arini; I am not Arini. His request is a boon upon me; his demand is forbidden.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
था अरिनी गो कलीम मैं अरिनी गो नहीं। उस को तक़ाज़ा रवा मुझ पे तक़ाज़ा हराम।
विस्तार
यह शेर अपनी पहचान और चाहत की हकीकत पर एक गहरा तंज़ है। शायर, अल्लामा इकबाल, कहते हैं कि मैं वो 'अरिनी गो' नहीं जो मैं पहले था। मैं उस पुरानी पहचान को नकारते हुए, एक नई सच्चाई की तरफ इशारा करते हैं। दूसरी लाइन में महबूब की मांग की बात है—एक ऐसी मांग जो हराम है, यानी जो मुमकिन नहीं। यह शेर बताता है कि अपनी असली पहचान पाने के लिए, हमें हर तरह के बंधनों और उम्मीदों से आज़ाद होना पड़ता है।
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