गर्म-ए-फ़ुग़ाँ है जरस उठ कि गया क़ाफ़िला
वाए वो रह-रौ कि है मुंतज़़िर-ए-राहिला
“The fervor of parting has raised the caravan; Oh, wait in the path, for the awaited traveler.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
विदाई की गर्मी ने काफिला उठा दिया है; हे, राहगीर बनकर इंतज़ार करो, क्योंकि वह अपेक्षित यात्री अभी भी है।
विस्तार
यह शेर विरह और इंतज़ार के दर्द को बयां करता है। पहले मिसरे में शायर कहते हैं कि राह-ए-सफ़र बहुत कठिन और तपती हुई है, और वो क़ाफ़िला (समूह) तो जा चुका है। और दूसरे मिसरे में, वो हवा से गुज़ारिश कर रहे हैं कि रुक जाओ, क्योंकि मैं किसी मुंतज़िर राहगीर का इंतज़ार कर रहा हूँ। यह वियोग का ऐसा नज़ारा है, जो दिल को छू जाता है!
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