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पनप सका न ख़याबाँ में लाला-ए-दिल-सोज़
कि साज़गार नहीं ये जहान-ए-गंदुम-ओ-जौ

My heart's beloved, I couldn't find you in the street, For this world of wheat and barley has no musician's beat.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

ख़याबाँ में लाला-ए-दिल-सोज़ पनप सका न, कि साज़गार नहीं ये जहान-ए-गंदुम-ओ-जौ।

विस्तार

यह शेर बताता है कि गहरा और जुनून भरा इश्क़, दुनिया की साधारण हकीकत में नहीं बस सकता। शायर कहते हैं कि दिल को जला देने वाला ये एहसास.... किसी गली-नुक्कड़ में नहीं पनप सकता। क्यों? क्योंकि यह दुनिया, जो सिर्फ़ गेहूँ और जौ का एक मिश्रण है, वो किसी मंच (स्टेज) के लायक नहीं है। इसका मतलब है कि इश्क़ की गहराई को दुनिया समझ नहीं सकती।

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