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या शब की सल्तनत में दिन का सफ़ीर आया
ग़ुर्बत में आ के चमका गुमनाम था वतन में

In the kingdom of the night, the messenger of the day arrived, In exile, he shone brightly in the forgotten homeland.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

या रात के साम्राज्य में दिन का दूत आया, और परदेश में आकर वह गुमनाम वतन में चमका।

विस्तार

यह शेर एक गहरे बदलाव की कहानी कहता है। 'रात की सल्तनत' वो समय है जब हम ग़म या निराशा में होते हैं.... और 'दिन का सफ़ीर' क्या है? यह उम्मीद, ज्ञान, या किसी नई रोशनी का आगमन है! शायर समझा रहे हैं कि चाहे हालात कितने भी बुरे क्यों न हों, जब कोई नई चेतना आती है, तो वह एक भूले हुए वतन को फिर से चमका देती है।

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