Sukhan AI
नई तहज़ीब तकल्लुफ़ के सिवा कुछ भी नहीं
चेहरा रौशन हो तो क्या हाजत-ए-गुलगूना फ़रोश

The new refinement is nothing but pretense, If the face is bright, what need for the gossip-seller's show?

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

नई तहज़ीब केवल दिखावा है; यदि चेहरा स्वयं ही उज्ज्वल है, तो गपशप करने वाले के दिखावे की क्या ज़रूरत है।

विस्तार

यह शेर बताता है कि सच्ची तहज़ीब क्या होती है। शायर कहते हैं कि जो 'नई तहज़ीब' हम देखते हैं, वह तो बस दिखावा और बनावट (तकल्लुफ़) है। असली बात यह है कि अगर किसी इंसान का चेहरा, उसका वजूद, रौशन है, तो उसे किसी दिखावे या झूठी अदाकारी (गुलगूना फ़रोश) की क्या ज़रूरत! सच्ची रौनक तो अंदर से आती है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.