नज़र नहीं तो मिरे हल्क़ा-ए-सुख़न में न बैठ
कि नुक्ता-हा-ए-ख़ुदी हैं मिसाल-ए-तेग़-ए-असील
“If you do not look, you will not sit in my circle of poetry, for the dots of true self are like the blade of the pure sword.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
अगर आप नहीं देखेंगे, तो आप मेरे काव्य-समूह में नहीं बैठ सकते, क्योंकि सच्चे स्व के बिंदु एक शुद्ध तलवार की धार के समान हैं।
विस्तार
ये शेर एक बहुत गहरा चैलेंज है! शायर यहाँ कह रहे हैं कि अगर आप दिल से नहीं सुनेंगे, अगर आपका ध्यान इन शब्दों में नहीं है, तो मेरे कलाम के घेरे में बैठिए ही मत। क्यों? क्योंकि जो बात मैं कह रहा हूँ—ख़ुदी का नुक्ता—वो सिर्फ़ बात नहीं है। ये तो एक असली तलवार की तरह तीक्ष्ण है! यह सिर्फ़ एक चुनौती नहीं, बल्कि एक आत्म-सम्मान की बात है।
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