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मिरी नवा में नहीं है अदा-ए-महबूबी
कि बाँग-ए-सूर-ए-सराफ़ील दिल-नवाज़ नहीं

In my love, there is not the grace of the beloved, Nor is there the enchanting sound of the flute's call.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

मेरे प्रेम में महबूब की अदा नहीं है, और न ही सरफिल बाँसुरी की दिल को मोहने वाली आवाज़ है।

विस्तार

यह शेर महबूब की उस खूबसूरती को बयां करता है जो ज़बरदस्ती नहीं, बल्कि अपने आप में बसी हो। शायर कहते हैं कि नबी की अदा इतनी नाज़ुक है कि उसे किसी वाद्य यंत्र (जैसे सराफ़ील) की तेज़ धुन की ज़रूरत नहीं। उसकी खूबसूरती अपने आप में इतनी दिलकश है कि वह बिना किसी शोर के, सीधे दिल को छू जाती है। यह तारीफ है सादगी और तहज़ीब की!

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पाठ
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