अगर हो ज़ौक़ तो ख़ल्वत में पढ़ ज़ुबूर-ए-अजम
फ़ुग़ान-ए-नीम-शबी बे-नवा-ए-राज़ नहीं
“If you have the inclination, read the Book of Azam in solitude, For the sorrow of the semi-night does not have the voice of secrets.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
अगर तुम्हें रुचि हो तो अकेले में ज़ुबूर-ए-अजम पढ़ो, क्योंकि आधी रात के दुःख में रहस्य की कोई आवाज़ नहीं है।
विस्तार
यह शेर हमें आत्म-मंथन का संदेश देता है। शायर कहते हैं कि अगर आपके अंदर ज़ौक़ (रुचि) है, तो आपको एकांत में बैठकर अपनी आत्मा को पढ़ना चाहिए। यह रात की सैर.... बस यूँ ही भटकना नहीं है। इसमें एक गहरा, रहस्यमय सुर छिपा है! यह हमें सिखाता है कि ज़िंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई बाहर नहीं, बल्कि भीतर ही मिलती है।
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