तिरे मक़ाम को अंजुम-शनास क्या जाने
कि ख़ाक-ए-ज़ि़ंदा है तू ताबा-ए-सितारा नहीं
“How can the star-gazer know the station of the beloved, That you are dust of the living, not the ashes of a star?”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
तेरे ठिकाने को तारा देखने वाला क्या जान सकता है, कि तू ज़िंदा की धूल है, तारे की राख नहीं।
विस्तार
यह शेर एक बहुत गहरे रहस्य की बात करता है। शायर कहते हैं कि जो इंसान बस आसमान में टिमटिमाते तारों को देखता है, वह आपके असली वजूद को कैसे जान सकता है? आप सिर्फ़ सितारों के टूटे हुए अवशेष नहीं हैं। आप तो ज़िंदा ख़ाक हैं—यानी एक ऐसी हस्ती जो ज़मीन से जुड़ी है, जो ज़िंदा है। यह बात बताती है कि आपकी असलियत, किसी भी चमक से कहीं ज़्यादा गहरी है।
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