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ख़ाकी है मगर इस के अंदाज़ हैं अफ़्लाकी
रूमी है न शामी है काशी न समरक़ंदी

It is drab, yet its style is ecstatic; / It is neither Rumi, nor Shami, nor Kashi, nor Samarkand.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

यह मैला है, मगर इसका अंदाज़ मदहोश है; यह न रूमी है, न शम्मी है, न काशी है, न समरकंद।

विस्तार

यह शेर हमें बाहरी दिखावे और आंतरिक खूबसूरती के फर्क को समझाता है। शायर कहते हैं कि कोई जगह भले ही साधारण, 'ख़ाकी' हो, लेकिन उसका अंदाज़ 'अफ़्लाकी' है, यानी उसमें एक अलौकिक चमक है। इसका मतलब है कि किसी भी महानता के लिए किसी प्रसिद्ध शहर का होना ज़रूरी नहीं है। असली जादू तो सादगी में छिपा होता है!

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