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शेर मर्दों से हुआ बेश-ए-तहक़ीक़ तही
रह गए सूफ़ी ओ मुल्ला के ग़ुलाम ऐ साक़ी

The lion's truthfulness is nothing before men; / Only the Sufis and Mullas remain slaves to the cupbearer.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

शेर का सच पुरुषों के सामने निराधार है; केवल सूफ़ी और मुल्ला ही साक़ी के गुलाम बने रहते हैं।

विस्तार

यह शेर अल्लामा इकबाल साहब द्वारा कहा गया एक गहरा तंज़ है। शायर कहते हैं कि असली हिम्मत और समझदारी (जो शेरों में होती है) अब इंसानों में नहीं बची। आज के दौर में जो लोग बचे हैं, वे सिर्फ़ सूफी और मुल्लाओं के ग़ुलाम बनकर रह गए हैं। यह एक आईना है, जो हमें अपनी रूहानी और ज़ौक़-ए-हक़ीक़त की याद दिलाता है।

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