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कहीं ज़िक्र रहता है 'इक़बाल' तेरा
फ़ुसूँ था कोई तेरी गुफ़्तार क्या थी

Your mention remains somewhere, Iqbal, What magic was in your speech?

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

कहीं ज़िक्र रहता है 'इक़बाल' तेरा, जैसे तेरी बातों में कोई जादू था।

विस्तार

दोस्तों.... यह शेर सिर्फ़ यादों की बात नहीं करता.... यह उस जादू की बात करता है.... जो किसी की बातों में होता है! शायर कहते हैं कि किसी का ज़िक्र कहीं न कहीं ज़िंदा रहता है.... और वो गुफ़्तार... वो फ़ुसूँ... क्या थी? ये एहसास है.... कि कुछ लोग होते हैं.... जिनकी बातों में एक अलग ही नशा होता है.... जो कभी उतरता ही नहीं!

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