न तू ज़मीं के लिए है न आसमाँ के लिए
जहाँ है तेरे लिए तू नहीं जहाँ के लिए
“Neither are you for the earth nor for the sky, Where you are, you are not for the world.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
न तुम धरती के लिए हो और न आसमान के लिए, जहाँ तुम हो, तुम जहाँ के लिए नहीं हो।
विस्तार
यह शेर अल्लामा इकबाल साहब के शब्दों में एक गहरे फ़लसफ़े को बयान करता है। ये सवाल करता है कि क्या आपका वजूद सिर्फ़ ज़मीन के लिए है, या आसमाँ के लिए भी? शायर कहते हैं कि भले ही यह सारा जहाँ आपके इर्द-गिर्द घूमता हो, लेकिन आप असल में इस जहाँ के लिए नहीं हैं। यह हमें एक गहरी पहचान की ओर इशारा करता है।
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