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था जहाँ मदरसा-ए-शीरी-ओ-शाहंशाही
आज इन ख़ानक़हों में है फ़क़त रूबाही

Where once was the school of the city and empire's glory, Today only a single chamber remains in these khanqahs.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

जहाँ कभी शहर और साम्राज्य की शानो-शौकत वाला मदरसा था, आज इन खानकाहों में केवल एक कमरा बचा है।

विस्तार

यह शेर एक बड़े बदलाव और पतन की बात करता है। शायर साहब कहते हैं कि जहाँ कभी 'मदरसा-ए-शीरी-ओ-शाहंशाही' था—यानी शायरी और राजसी ठाट का एक बड़ा केंद्र—आज उन खानक़ाहों में सिर्फ 'रौबाही' बचा है। यह महज़ एक तुलना नहीं है, बल्कि एक गहरा दर्द है.... कि कैसे कभी महान संस्कृति और ज्ञान का केंद्र था, वह अब केवल क्षणिक मस्ती और नशे में चूर हो गया है।

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