कहता हूँ वही बात समझता हूँ जिसे हक़
ने आबला-ए-मस्जिद हूँ न तहज़ीब का फ़रज़ंद
“I speak the same thing, I understand what the heart/fate decrees; I am neither the beloved of the mosque, nor the descendant of refinement.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
मैं वही बात कहता हूँ, वही बात समझता हूँ जो हक़ ने (किस्मत ने) तय की है; मैं न तो मस्जिद का महबूब हूँ और न ही तहज़ीब का वंशज।
विस्तार
यह शेर इंसान की अपनी सच्चाई और समाज की बनाई परतों के बीच के संघर्ष को दिखाता है। शायर कहते हैं कि मेरी बातें किसी सीख या तहज़ीब से नहीं आतीं, बल्कि मेरी ज़ुबान पर वो बात आती है जिसे सिर्फ़ तक़दीर ने लिखा है। यह अपनी मौलिकता को स्वीकार करना है, बिना किसी दिखावे के।
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