हूँ आतिश-ए-नमरूद के शो'लों में भी ख़ामोश
मैं बंदा-ए-मोमिन हूँ नहीं दाना-ए-असपंद
“Even in the flames of the city of Nimrod, I am silent; I am a believer, not a seed of discord.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
मैं नमरूद के अलाव के शो'लों में भी शांत हूँ। मैं एक मोमिन (आस्तिक) व्यक्ति हूँ, न कि कलह का बीज।
विस्तार
यह शेर अटूट आस्था और मज़बूती की बात करता है। शायर कह रहे हैं कि नमरूद की आग के शोले झेलने के बाद भी वे शांत हैं। वे अपनी पहचान को एक सच्चे मोमिन के रूप में बताते हैं। उनका मानना है कि उनकी आस्था किसी कीमती, लेकिन क्षणभंगुर चीज़ जैसे नीलम (असपंद) से कहीं ज़्यादा गहरी और टिकाऊ है। यह आत्म-विश्वास का एक शानदार इज़हार है।
