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हर हाल में मिरा दिल-ए-बे-क़ैद है ख़ुर्रम
क्या छीनेगा ग़ुंचे से कोई ज़ौक़-ए-शकर-ख़ंद

In every state, my heart is unrestrained, O Khurram, What pleasure of sweetness can anyone snatch from a bud?

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

हर हाल में मेरा दिल आज़ाद है, ख़ुर्रम; किसी से गुँधे में मिठास का आनंद कैसे छीना जा सकता है।

विस्तार

यह शेर रूह की आज़ादी की बात करता है। शायर कहते हैं कि मेरा दिल हर हाल में बे-क़ैद है। वे सवाल करते हैं कि कोई भी ग़ुंचे से जो प्राकृतिक, मीठी ख़ुशी है, उसे छीन सकता है? यह एक ज़बरदस्त दावा है अपनी आत्म-सम्मान और भावनात्मक आज़ादी का—एक ऐसी रूह जो कभी क़ैद नहीं हो सकती।

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