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अब हुजरा-ए-सूफ़ी में वो फ़क़्र नहीं बाक़ी
ख़ून-ए-दिल-ए-शेराँ हो जिस फ़क़्र की दस्तावेज़

In the Sufi chamber, that poverty is no longer present, The proof of the poet's heart's blood is the poverty I attest.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

सूफ़ी के इस कमरे में अब वह सादगी (या गरीबी) नहीं बची है, जिस सादगी का प्रमाण शायर के दिल के खून से मिलता है।

विस्तार

यह शेर बहुत गहरा है। शायर कहते हैं कि वो सादगी, वो फ़क़्र जो पहले सूफी महफ़िल में दिखती थी, वो अब बाक़ी नहीं रही। अब असली दस्तावेज़ क्या है? वह है शायर के दिल का ख़ून। यानी, अब बाहरी दिखावे से ज़्यादा, शायर की रूह का लहू, उसका दर्द, उसकी तड़प ही उसकी सच्चाई और उसकी पहचान बन गई है।

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