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ये पीरान-ए-कलीसा-ओ-हरम ऐ वा-ए-मजबूरी
सिला इन की कद-ओ-काविश का है सीनों की बे-नूरी

O breath of the shrine and the tomb, oh wind of desperation, It is from the search for your stature that the chests are without light.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

ये पीरान-ए-कलीसा-ओ-हरम और मजबूरी की हवा, इन दोनों की कद-ओ-काविश के कारण सीनों में कोई रोशनी नहीं है।

विस्तार

यह शेर उस आध्यात्मिक तलाश की बात करता है, जो अक्सर निराशा की ओर ले जाती है। शायर यहाँ एक आध्यात्मिक गुरु को संबोधित करते हैं, यह स्वीकार करते हुए कि यह खोज मजबूरी में की जा रही है। लेकिन इस अथक खोज का फल क्या मिलता है? केवल दिल का अंधेरा। यह एक बहुत गहरा विचार है कि जब हम किसी बाहरी सहारे की तलाश करते हैं, तो हमें अक्सर अपने अंदर का खालीपन ही मिलता है।

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