फ़क़ीरान-ए-हरम के हाथ 'इक़बाल' आ गया क्यूँकर
मयस्सर मीर ओ सुल्ताँ को नहीं शाहीन-ए-काफ़ूरी
“From the hands of the fakirs of the precinct, why did Iqbal come? / Neither Mir nor Sultan possess the eagle of Kafuri.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
हरम के फ़कीरों के हाथों 'इक़बाल' आ गया क्योंकर। मीर और सुल्तान को नहीं काफ़ूरी का शाहीन।
विस्तार
यह शेर एक ज़बरदस्त आत्मविश्वास और अपनी कला का घमंड दिखाता है। शायर कह रहे हैं कि 'इक़बाल' जब दरिद्रों के हाथों में आ गए, तो मेरी शान का क्या कहना! मेरी प्रतिभा इतनी अनोखी है कि मीर और सुल्तान जैसे महान शायर भी मेरे जैसा 'काफ़ूरी शाहीन' नहीं बन सकते। यह अपनी अद्वितीय कला का ऐलान है!
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