આષાઢી સાંજનાં અંબર ગાજે
અંબર ગાજે મેઘાડંબર ગાજે! -આષાઢી.
“In the evening of Ashadh, the heavens thunder,The heavens thunder, the stormy clouds thunder! -Ashadh.”
— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ
आषाढ़ की शाम में आकाश गरजता है। आकाश गरजता है और बादलों का समूह भी गरजता है।
विस्तार
यह दोहा आषाढ़ मास की शाम का सुंदर चित्रण करता है, जो भारत में मानसून का महीना होता है। कल्पना कीजिए एक बरसात की शाम का विशाल आकाश, जो काले बादलों से घिरा है। कवि आसमान के गरजने का सजीव वर्णन करते हैं, और यह केवल एक बार नहीं, बल्कि गरजते बादलों के साथ इस ध्वनि को और भी भव्य बताते हैं। यह प्रकृति के प्रताप का एक शक्तिशाली बिंब है, जो बादलों की गहरी गड़गड़ाहट और बारिश से भरे बादलों की नाटकीय उपस्थिति को दर्शाता है, जिससे वातावरण उनकी शानदार ध्वनि से भर जाता है।
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