ग़ज़ल
काल-सैन्य आ गए
لشکرِ کَال آ گئے
यह ग़ज़ल एक ऐसे आंदोलन को दर्शाती है जहाँ देश के कोने-कोने से लोग—खेतों, जंगलों, सागरों और पहाड़ों से—एक गहरी पुकार सुनकर एकत्रित हुए हैं। वे 'काँटों का पवित्र ताज' धारण करके आते हैं, जो बलिदान का प्रतीक है, और उनका दृढ़ उद्देश्य पीड़ित और दलितों के लिए एक शासन स्थापित करना है। यह न्याय के एक नए युग की शुरुआत करने वाली एक दृढ़ शक्ति की बात करती है।
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