“With fearful steps, these bodies are like Vaman's small frame,Unsoaked, they stand on the river's bank: Oh, mine!”
डरते-डरते और हिचकिचाते हुए कदमों से, ये शरीर वामन के छोटे से रूप जैसे हैं। वे नदी के किनारे पर बिना भीगे खड़े हैं, पानी से अछूते।
यह दोहा मानव स्थिति, खासकर आध्यात्मिक यात्रा पर एक व्यक्ति की आंतरिक स्थिति का वर्णन करता है। इसमें बताया गया है कि कोई डरते-डरते छोटे-छोटे कदम उठा रहा है, खुद को वामन अवतार जितना छोटा और नगण्य महसूस कर रहा है। लेकिन इस बाहरी विनम्रता और भय के बावजूद, हमारे भीतर के छह 'तीर' – हमारी वासना, क्रोध, लोभ और अहंकार जैसे विकार – 'अछूते' या 'अभिंजल' बने हुए हैं। इसका अर्थ है कि वे अभी तक अप्रभावित, अजेय और शक्तिशाली हैं। यह पद आध्यात्मिक प्रगति की हमारी इच्छा और हमारी जन्मजात मानवीय कमजोरियों के लगातार खिंचाव के बीच के संघर्ष को खूबसूरती से दर्शाता है। यह हमें आगे बढ़ते हुए भी इन आंतरिक चुनौतियों को स्वीकार करने का आह्वान करता है।
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