કૈલાસી કંદરાની રૂપેરી સોડ થકી
ઓતરાદા વાયરા, ઊઠો!
“From Kailas's silvery cave-side, O northern winds, arise!”
— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ
कैलाश की चांदी-सी गुफा के किनारे से, हे उत्तरी हवाओ, उठो!
विस्तार
यह सुंदर दोहा उत्तरी पवनों को एक काव्यात्मक आह्वान है। यह कल्पना करता है कि ये पवनें कैलाश पर्वत की गुफाओं की "रुपहली गोद" में शांति से सो रही हैं। "रुपहली" शब्द बर्फ, चाँदनी, या पवित्र पर्वत की अलौकिक सुंदरता को दर्शा सकता है। कवि धीरे से उन्हें जगा रहे हैं, उनसे उठने और अपनी यात्रा शुरू करने का आग्रह कर रहे हैं। यह कैलाश जैसे पूजनीय, आध्यात्मिक स्थान से उत्पन्न होने वाली प्रकृति की विशालता, पवित्रता और राजसी शक्ति का अनुभव कराता है। यह प्रकृति के जागरण का एक सजीव चित्रण है, जो कृपा और रहस्य से भरा है।
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